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झारखंड में मिला नोटों का जखीरा, दस हजार के रिश्वत कांड ने ईडी को पहुंचाया करोड़ों के पास

-      झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री के सचिव के नौकर के घर से बरामद हुआ करीब 30 करोड़ रुपये नकद

 

झांरखंड। झारखंड में एक बार फिर नोटो का जखीरा बरामद हुआ है, दस हजार रुपये ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को 25 करोड़ रुपयों का रास्ता दिखा दिया। ताजा मामला है राजधानी रांची का यहां झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल के एक नौकर के घर से ईडी को करोड़ों की नकदी मिली है। फिलहाल जितनी नकदी मिली उसे करीब 30 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जो और भी बढ़ सकती है। इस मामले का खुलास दस हजार रुपये की रिश्वत के कारण हुआ है।

ED ने राँची में ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़े लोगों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की। मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल के नौकर जहाँगीर के यहाँ भी ED दबिश दी। यहाँ ईडी को नोटों का पहाड़ मिला। सूचना मिलने तक  ED 30 करोड़ गिन चुकी थी, यह रकम बड़े-बड़े बैग में भर कर रखा गया था।

यह पूरा प्रकरण 10 हजार रुपये की रिश्वत के कारण प्रकाश में आया। इसमें अब तक सैकड़ों करोड़ का खुलासा हो चुका है। दरअसल, नवम्बर 2019 में झारखंड सरकार में कार्यरत एक जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। सुरेश एक ठेकेदार से ये रिश्वत ले रहा था। उसकी गिरफ्तारी एसीबी ने की थी। इसके बाद एजेंसी ने वर्मा के घर और बाकी ठिकानों की जाँच चालू की।

जब वर्मा के घर पर एजेंसी जाँच करने के लिए पहुँची तो उसे यहाँ ₹2 करोड़ से अधिक की धनराशि बरामद हुई। एजेंसी को पूछताछ में पता चला कि वर्मा किराए के घर में रहता है और यह घर ग्रामीण विकास विभाग के चीफ इंजीनियर वीरेंद्र राम का है। वर्मा ने यह भी बताया कि यह पैसा उसका नहीं बल्की वीरेंद्र राम का है, उसने ही वर्मा को रखने के लिए दिया था। इसके बाद जाँच की सुई वीरेंद्र राम की ओर मुड़ी।

फरवरी, 2023 में वीरेंद्र राम के ठिकानों पर छापेमारी शुरु हुई। वीरेंद्र राम के यहाँ ED को 30 लाख रुपये मिले। इसके अलावा 1.5 करोड़ रुपये के जेवर मिले। ED को यहाँ कई कागजात भी मिले। जिससे पता चला कि वीरेंद्र राम के पास ₹100 करोड़ की चल-अचल सम्पत्ति है। वीरेंद्र राम को एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया। वीरेंद्र राम पर ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वन में गड़बड़ी करने का आरोप लगा था।

अब इस मामले में ED फिर सक्रिय हो गई है और उसने ग्रामीण विकास मंत्रालय के मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव के ठिकानों को तलाशना चालू कर दिया है। बताया गया कि जिस नौकर के यहाँ करोड़ों की नकदी मिली है, वह मात्र ₹15 हजार प्रति माह पाता है। एजेंसी अब इस पैसे का स्रोत पता करने में जुट गयी है।

 

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