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विदेश से
फोन कॉल कर उन्हें दी जा रही है धमकी, 140 कोड वाले नंबर से आ रही कॉल
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जज रवि
कुमार दिवाकर ने ही तौकीर रजा को 2010 दंगों के मामले में की थी सुनवाई
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित
ढाँचे में सर्वे का फैसला देने वाले जज रवि कुमार दिवाकर को विदेशों से धमकी भरी
कॉल आ रही हैं। जज ने का कहना है कि पिछले 20-24
दिन में 140 कोड वाले नंबरों से कई बार उन्हें धमकी भरे
फोन आये हैं। इस संबंध में उन्होंने एसएसपी को पत्र लिखकर शिकायत की है। शिकायत की
एक कॉपी जिला जज को भी दी गई है।
गौरतलब है कि रवि कुमार दिवाकर
फिलहाल बरेली में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में जज हैं। उन्होंने कुछ समय पहले 2010 में हुए दंगे के केस में मौलाना तौकीर रजा को मुख्य
अभियुक्त बनाने वाले मामले की की सुनवाई की थी। इस मामले में उन्होंने तौकीर रजा के खिलाफ
वारंट जारी कर पुलिस को निर्देश दिये थे कि तौकीर रजा को अदालत में पेश किया जाए।
हालाँकि इसके बाद तौकीर रजा का मामला उनकी अदालत से ट्रांसफर हो गया और फिर मौलाना
को सुप्रीम कोर्ट से राहत दे दी गई मगर इसी,
बीच जज को विदेशों से कॉल आना
शुरू हो गईं।
जज के अनुसार, उन्होंने एसएसपी सुशील घुले को पत्र लिखकर
कार्रवाई करने को कहा है। इस संबंध में एसएसपी ने बताया कि उन्हें न्यायाधीश का
पत्र मिला है। साइबर सेल से वो मामले की जाँच करवा रहे हैं। जो भी तथ्य सामने
आएँगे उसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है
कि जज को इस प्रकार से अंतरराष्ट्रीय नंबरों से धमकियाँ दी जा रही हों। इससे पहले
उन्होंने जब ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का फैसला दिया था उस समय उन्हें धमकी भरा
पत्र मिला था। पत्र में लिखा था–
“अब
न्यायाधीश भी भगवा रंग में सराबोर हो चुके हैं। फैसला उग्रवादी हिंदुओं और उनसे
जुड़े संगठनों को प्रसन्न करने के लिए सुनाते हैं। इसके बाद ठीकरा विभाजित भारत के
मुसलमानों पर फोड़ते हैं। आप न्यायिक कार्य कर रहे हैं। आपको सरकारी मशीनरी मिली
है, फिर आपकी पत्नी व माँ को डर कैसा है? आजकल न्यायिक अधिकारी हवा का रूख
देखकर चालबाजी दिखा रहे हैं। आपने वक्तव्य दिया था कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का
निरीक्षण एक सामान्य प्रक्रिया है। आप भी तो मूर्तिपूजक हैं। आप मस्जिद को मंदिर
घोषित कर देंगे। कोई भी काफिर मूर्तिपूजक हिंदू न्यायाधीश से मुसलमान सही फैसले की
उम्मीद नहीं कर सकता।”
इस धमकी के बाद प्रशासन ने जज की सुरक्षा और बढ़ा दी थी। उनके साथ हमेशा 9-10 पुलिसकर्मी रहते थे। बरेली ट्रांसफर होने के बाद उनके साथ दो सुरक्षाकर्मी हमेशा रहते हैं। फिर भी सुरक्षा की चिंता करते हुए कहा जा रहा है कि आतंकियों से लड़ने के लिए 2 सुरक्षाकर्मी पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि उनके पास हथियार भी नहीं होते, जबकि आतंकियों के पास गन होती हैं। पिछले साल लखनऊ स्थित उनके आवास के पास से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का एक सदस्य गिरफ्तार हुआ था, जिसके बाद शाहजहाँपुर एसएसपी ने जज के आवास के बाहर गनर तैनात करवाए थे।