भारत अब आतंकवाद और अलगाववाद को बर्दाश्त नहीं करने वाला है
उसकी कमर तोड़ने के लिए कमर कस चुका है। इसी क्रम में भारत के भीतर पनप रहे
नक्सलवाद को कुचलने का काम जारी है भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की बटालियन ने
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सलियों के उस निशान को तोड़ दिया, जिसे वे अपने इलाके
के तौर पर दर्शाते थे। मंलगवार (9 अप्रैल 2024) को हुई इस कार्रवाई
का ITBP ने वीडियो भी बनाया है, जो सोशल मीडिया पर
वायरल हो रहा है।
छत्तीसगढ़
ITBP ने इस कार्रवाई को अपने X हैंडल पर शेयर किया
है। ITBP ने लिखा, “53वीं वाहिनी ने कस्तूरमेटा क्षेत्र, नारायणपुर
(छत्तीसगढ़) के ईकपाड इलाके में वामपंथी उग्रवादियों के एक स्मारक को ध्वस्त
किया।” शेयर
किए गए वीडियो और तस्वीरों में लाल रंग के पक्के स्मारक पर कुछ जवान चढ़े दिख रहे
हैं। इनके हाथों में हथौड़ी, गैंती, फावड़ा व अन्य औजार
हैं। थोड़े समय के बाद ही यह स्मारक मलबे में तब्दील हो जाता है।
ऑपइंडिया के खबर के मुताबिक CRPF के अधिकारी के
हवाले से बताया गया कि लगभग एक दशक पहले ऐसे स्मारक छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों
में हजारों की तादाद में हुआ करते थे। इन स्मारकों को वामपंथी अपने इलाके का
प्रतीक के तौर पर बनवाते थे। इन स्मारकों के ऊपर नक्सली अपना लाल झंडा फहरा कर
रखते थे।
अधिकारी
ने आगे बताया कि धीरे-धीरे नक्सलियों का दमन हुआ और स्मारक भी खत्म होते चले गए।
वर्तमान में ऐसे स्मारक न के बराबर हैं। उनका कहना है कि सुरक्षाबलों का मूवमेंट
आगे बढ़ रहा है और जल्द ही ऐसे स्मारकों की तादाद शून्य हो जाएगी। अधिकारी ने इसके
लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जागरूकता और सोच में बदलाव को प्रमुख
कारण बताया।
गौरतलब है कि इसी सप्ताह CRPF के जवानों ने
छत्तीसगढ़ के लाखापाल क्षेत्र में आने वाले गाँव केरलापेंडा में 23 साल से बंद पड़े एक मंदिर की साफ़-सफाई के बाद वहाँ
पूजा-अर्चना शुरू करवाई है। तब ग्रामीणों ने बताया था कि कभी वहाँ श्रद्धालुओं का
मेला लगता था, लेकिन
नक्सलियों की वजह से धीरे-धीरे मेला बंद हो गया और मंदिर जर्जर होता चला गया।