राहुल गांधी ये क्या कर रहे, इससे देश में पैदा हो सकती है अराजकता
सत्ता में लौटे तो करायेंगे संपत्ति
के बंटवारे का सर्वे,
राहुल गांधी की राजनीति देश को
तोड़ती है या जोड़ती है
कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल
गांधी की राजनीति किस दिशा में जा रहे है ये समझ से परे होता जा रहा है। राहुल गांधी
देश में जातीय जनगणना का मुद्दा उठाकर समाज में वैमनस्यता पैदा करना चाह रहे हैं
या इस मुद्दे का कोई देश के विकास में अग्रसन होने का आधार भी है। राहुल गांधी ने
तेलंगाना में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुआ कहां कि यदि उनकी पार्टी सत्ता
में आयी तो हमारा वादा है कि हम संपत्ति के बंटवारे का सर्वेक्षण करायेंगे, यानी
जिसकी जितनी आबादी उसका उतना हक।
जाति जनगणना
कराये जाने का मतलब ये है कि भारत की बहुसंख्य आबादी को उनकी जाति के आधार पर
अलग-अलग खेमों में खड़ा कर उनके मन में एक दूसरे के प्रति घृणा पैदा करना। देश के
विकास को रफ्तार देने और विकसित बनाने का खांका खिंचने के बजाए बांटने की राजनीति
का भविष्य कितना है ये तो लोकसभा चुनाव में जनता तय करेंगी। लेकिन कांग्रेस पार्टी
आज भी अपनी उसी घिसी पिटी राजनैतिक मानसिकता पर चल रही है जिस प्रकार वह कई दशकों
तो गरीबी हटाओं का नारा देकर सत्ता प्राप्त करती रही है।
अपने
भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रव्यापी जाति जनगणना के जरिए ओबीसी, एससी
एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय से कितने लोग है, उसके बाद धन के समान वितरण को
सुनिश्चत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम के तहत हम एक वित्तीय और संस्थागत सर्वेक्षण
करायेंगे। राहुल ने कहा कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों की संख्या
कुल आबादी का 90 प्रतिशत है लेकिन आप उन्हें नौकरियों में नहीं देखेंगे।