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Haldwani Riots : हल्द्वानी को जलाने की साजिश

- मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पुलिस और प्रशासनिक अमले पर बोला हमला

- दंगे में 4 की मौत, तीन सौ पुलिस कर्मी घायल, दंगाईयों को देखते ही गोली मारने का आदेश

- हर दंगाई को चिन्हित कर की जाएगी कठोरतम कार्रवाई

उत्तराखंड। हल्दवानी बनभूलपुरा में गुरुवार को अवैध मस्जिद और मदरसा पर प्रशासन की कार्रवाई के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों न पुलिस और प्रशासन पर हमला कर दिया। इस घटना में चार लोगों की जान गयी है और तीन सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए है। इस घटना के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री केएस धामी ने दंगाईयों को देखते ही गोली मार देने का आदेश दिया है। पुलिस को सभी दंगाईयों को चिन्हित कर उनपर कठोरतम कार्रवाई का भी आदेश दिया गया है।

हल्द्वानी में जिस बनभूलपुरा में ये दंगा हुआ, वो पूरा इलाका सरकारी जमीन पर बसा है। प्रशासन लगातार अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई कर रहा था। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही थी। पिछले साल भी यहाँ बड़ा तनाव फैल गया था। इस बार अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत अवैध रूप से बने मस्जिद और मदरसा को हटाया जा रहा था। ये कार्रवाई लगभग पूरी भी हो गई थी। तभी वहाँ पहुँचती है एक मुस्लिम कट्टरपंथियों की बड़ी भारी भीड़। इस भीड़ में महिलाएँ और किशोर उम्र के बालक भी शामिल थे। उन्होंने प्रशासनिक कर्मचारियों से बहस की, और फिर देखते ही देखते आसपास की छतों से पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहाँ करीब 800 की संख्या में मौजूद पुलिस वालों, मीडिया व अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों-अधिकारियों को घेर लिया गया, उन पर हमला बोल दिया गया। ये एक तरह से एकतरफा जंग की तरह हो गया। मीडियां रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा राह है कि इन मुस्लिम कंटरपंथियों के पास बंदुके भी थी जिससे गोलियां भी चलायी गयी। पुलिस के उपर पेट्रोल बम से हमला किया गया।

डीएम नैनीताल ने बताया दंगाईयों का क्या था प्लान

नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने बताया कि अतिक्रमण विरोधी अभियान पर कोर्ट की कोई रोक नहीं थी। कोर्ट से फैसला आने के बाद ही ये अभियान चलाया जा रहा था। जिन संपत्तियों को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी, उसका कोई मालिक नहीं था। उन्होंने आगे कहा, “अतिक्रमण विरोधी अभियान कानूनी तौर पर सही तरीके से चलाया जा रहा था। हमारी टीमें वहाँ पहुँची। सारे संसाधन (बुलडोजर व अन्य गाड़ियाँ) मौके पर पहुँची। किसी को उकसाने या नुकसान पहुँचाने की कोशिश प्रशासन की तरफ से नहीं की गई। ये अभियान शांतिपूर्वक चल रहा था, तभी आधे घंटे के भीतर एक बड़ी भीड़ ने नगर निगम टीम पर पहला हमला किया।

    डीएम वंदना सिंह ने बताया, “ये हमला छतों पर इकट्ठे किए गए पत्थरों के जरिए किया गया। 30 जनवरी तक उन छतों पर कोई भी पत्थर नहीं था। न्यायालय में जब सुनवाई चल रही थी, तब भी वहाँ पत्थर नहीं थे। जिस दौरान सुनवाई चल रही थी, उस दौरान छतों पर पत्थर इकट्ठे किए गए। इसका मतलब है कि ये पूरी तरह से प्लानिंग की गई थी कि जिस दिन अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाएगा, उस समय हमला किया जाएगा। ताकि प्रशासन बैकफुट पर चला जाए। पत्थरों से हमला हुआ, तो हमारी टीम पीछे नहीं हटी। हमारी टीम काम करती रही, इसके बाद कट्टरपंथियों की दूसरी टीम आई, उनके हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने हाथों में प्लास्टिक की बोतलें पकड़ी हुई थी, उन्होंने उसमें आग लगाकर फेंकना शुरू किया। हमारी टीम तब भी अवैध ढांचे को तोड़ने में लगी रही।


    थाने को घेरकर पत्थरबाजी और पेट्रोल बम से आगजनी

    अतिक्रमण विरोधी अभियान वाली जगह पर कट्टरपंथियों के हमले में पुलिस के कई जवान घायल हो गए। कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही थी। इसके बाद इस भीड़ ने बनफूलपुरा पुलिस थाने को घेर लिया। उन्होंने पहले थाने पर पत्थर बरसाए। फिर पत्थरबाज पीछे हो गए। यहाँ भी पूरी सोची समझी प्लानिंग के तहत पत्थरबाजों के बाद आई हमलावरों की नई टीम, इस टीम के हाथों में पेट्रोल बम थे। उन्होंने बनफूलपुरा पुलिस थाने के  बाहर खड़ी गाड़ियों में आग लगाना शुरु कर दिया। आसपास से पुलिस पहुँचती, कि थाने में मौजूद पुलिस टीम को खुद को बचाने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

    डीएम वंदना सिंह ने बताया, “परिसंपत्तियों के नुकसान के तौर पर थाने को नुकसान पहुँचा। मुख्य बिल्डिंग को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन उसे हथौड़े से तोड़ने की कोशिश की गई। थाने में और थाने के बाहर खड़ी गाड़ियों खासकर पुलिस की गाड़ियों, प्रशासनिक गाड़ियों, नगर निगम की गाड़ियों और मीडिया कर्मियों की गाड़ियों को आग लगा दी गई। इस दौरान किसी भी दूसरे समुदाय ने इस भीड़ का विरोध किया, ऐसे में इसे धार्मिक तनाव नहीं कर सकते। ये पूरी तरह से बनभूलपुरा की भीड़ द्वारा राज्य सरकार को चैलेंज किया जा रहा था, प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा था।उनका इशारा इसी तरफ रहा कि ये भीड़ कुछ भी करके सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाना चाहती थी, ताकि आगे अतिक्रमण विरोधी अभियान न चलाया जा सके।

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