मोनेश श्रीवास्तव, संपादक
एक कहावत कही जाती है कि...विनाश काले विपरीत
बुद्धि, परन्तु जब बुद्धि में ही विनाश सवार हो जाए तो ऐसे
बुद्धि वाले विनाशक से समाज और राष्ट्र का बचाव ही राष्ट्रधर्म बन जाता है। ऐसी ही
विनाशक बुद्धि को लेकर संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सत्ता का विरोध करते
करते देश और संविधान विरोधी हो जाते हैं। इसी बात के कहते ही कई तथाकथित
बुद्धिजीवी प्रगट होते हैं जो कहते है कि सत्ता और प्रधानमंत्री का विरोध करना देश और संविधान का विरोध करना नहीं होता, तो उन्हें ये अपनी बुद्धि पर जरा जोर देकर समझना चाहिए कि संवैधानिक पद पर
लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आये व्यक्ति विशेष का नहीं उस पद का संवैधानिक सम्मान
होता है।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को गद्दार कहा है, और राहुल का कहना है कि वह इसके लिए माफी
नहीं मांगेंगे, और राहुल ने यह बात एक बार नहीं अपनी दो जन
सभाओं में दोहराया है। इससे साफ हो जाता है कि राहुल सत्ता पाने के लिए कितने लालच
से भरे बैठे हैं और अपनी पार्टी की राजनैतिक विरासत के अहंकार में मदमस्त हो गये
हैं। विरोध करना है करिए, पर राजनीति और सत्ता लोलूपता में
भारत विरोधियों के हाथ की कठपुतली बनकर मत नाचिए। और राहुल गांधी लगातार यही करते
नजर आ रहे हैं।
नरेंद्र मोदी का विरोध करना है तथ्यात्मक विरोध करो, लेकिन राष्ट्र और धर्म का विरोध बर्दाश्त नहीं होगा। नरेंद्र मोदी किसी
पार्टी के नेता होने से पहले वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री है जिनकी गरिमा के
साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि राहुल गांधी कि ये अमर्यादित भाषा
उन्हें उनकी पार्टी समेत गर्त में ले जाने में योगदान अवश्य करेगी।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है।
· “चौकीदार
चोर है”
2018–19 के दौरान राफेल मुद्दे पर राहुल गांधी ने बार-बार यह
शब्द इस्तेमाल किया।
· “सभी
चोरों के नाम मोदी क्यों होते हैं?”
2019 की चुनावी रैली में राहुल गांधी ने कहा था: “निरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी…”। इसी टिप्पणी पर
उनके खिलाफ मानहानि का मामला चला और बाद में सजा भी हुई, जिस पर उन्हें जमानत मिली।
· “100% चौकीदार चोर है”
कर्नाटक की एक रैली में राहुल गांधी ने सीधे यह टिप्पणी की थी।
· “पनौती”
टिप्पणी
2023 क्रिकेट विश्वकप फाइनल के बाद राहुल गांधी ने एक सभा में
मोदी के लिए “पनौती” शब्द का इस्तेमाल किया था, जिस पर
काफी विवाद हुआ।
· “चुनाव
चुराकर प्रधानमंत्री बने”
2025–26 में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी “election
stealing” के जरिए सत्ता में आए।
· “गद्दार”
और “नौटंकी” जैसी टिप्पणियाँ
हाल के राजनीतिक भाषणों में राहुल गांधी ने मोदी और अमित शाह पर
तीखे शब्दों का प्रयोग किया, जिस पर भाजपा ने कड़ी
प्रतिक्रिया दी।
सनातन विरोधियों के भी साथ,
राहुल का हाथ
भारतीय राजनीति में सनातन धर्म
से नफरत अब खुलकर सामने आने लगी है। इस क्रम में तमिलनाडु की डीएमके पार्टी के
नेता पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन द्वारा सार्वजनिक
मंचों से सनातन को खत्म करने की बात कही गयी है, हाल ही में वहां की विधानसभा में
उदयनिधि ने सनातन को खत्म करने की बात कही थी जिसपर विवाद खड़ा हुआ था, और राहुल राहुल
गांधी की पार्टी के समर्थन से इसी पार्टी की सरकार रही है। राहुल द्वारा कभी भी
सनातन का विरोध करने वाले के खिलाफ एक शब्द भी नहीं निकलता है यह दर्शाता है कि
राहुल का हाथ सनातन को खत्म करने वाले के साथ है। इसी राजनैतिक परिपाटी ने
कांग्रेस पार्टी को हाशिए पर ला खड़ा किया है, और ऐसा ही चलता रहा तो कांग्रेस देश
विरोधी, समाज विरोधी और सनातन विरोधी घोषित हो जाएगी।
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