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ऐसे होता है कोर्ट के आदेश का पालन, सात दिन नहीं सात घंटे में शुरु हुई पूजा

    ऐसे होता है कोर्ट के आदेश का पालन....योगी सरकार ने ये साबित कर दिया। 31 जनवरी को वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी स्थित व्यास जी के तहखाने में प्रतिबंधित पूजा-पाठ 31 जनवरी की मध्यरात्री ही से शुरु हो गयी....कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए पूरा जिला प्रसाशन आधी रात ज्ञानवापी परिसर में जुटा रहा....लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि तहखाने के इस स्थान पर पूजा-पाठ पर पाबंदी लगाये जाने का कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया था....मुलायम सिंह यादव की सरकार ने 1993 में एक मौखिक आदेश के बाद पूजा रुकवा दी थी....जिसके बाद से इस स्थान पर ताला जड़ दिया गया, पूजा बंद हो गयी, व्यास जी को वहां से बहिष्कृत कर दिया गया। तीस साल तक लगातार लड़ाई चलती रही कि हिन्दू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दिया गया। हिन्दू पक्ष ने पूरे नियम कानून और संविधान के दायरे में रहते हुए इस लड़ाई को लड़ता रहा....31 दिसंबर की शाम उस तहखाने में पूजा का आदेश वाराणसी कोर्ट के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेष ने दे दिया....और प्रशासन को निर्देश दिया कि सात दिनों के भीतर वहां पूरी सुरक्षा के साथ पूजा आरंभ करायी जाए। सात दिनों की मियाद को प्रदेश सरकार ने सात घंटे में अमल में लाया और जिला प्रशासन खड़ा होकर पूरी व्यवस्था करायी।

गुरुवार एक फरवरी से अब व्यास जी के तहखाने में तीस वर्षों से बंद आस्था का उल्लास लौट आया है इसके बाद से लोगों ने उस दिनों को याद किया जब अयोध्या में बाबरी विवादित ढ़ांचे में पूजा पाठ की 1985 में शुरुआत हुई थी और सुप्रीम कोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला आया और 22 जनवरी को राम भक्तों को राम मंदिर की सौगात मिली। आने वाले दिनों में ये साफ है कि ज्ञानवापी परिसर स्थित विवादित मस्जिद जो कि एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया है उसे संवैधानिक रूप से पूरी कानूनी लड़ाई लड़ते हुए जीत हासिल करेंगे।

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