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बलिदान को समर्पित दैनिक पंचांग (कैलेंडर)


-          वाराणसी के इतिहास पुरुष बाबू जगत सिंह की वीर गाथा प्रकाशित

-          मातृभूमि सेवा संस्था के अध्यक्ष राकेश कुमार भारतीय इतिहास के बलिदानियों और सेनानियों को समर्पित है ये कैलेंडर

मोनेश श्रीवास्तव, प्रधान संपादक

XposeTimesNewsDesk. भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष और इतिहास के वीर सपूतों को समर्पित कैलेंडर 2026 (दैनिक पंचांग) बुधवार को एक्सपोज टाइम्स के कार्यालय को भेट किया गया। एक्सपोज टाइम्स के राजनीतिक संपादक डॉ. अरविंद कुमार सिंह द्वारा प्रधान संपादक मोनेश श्रीवास्तव को प्रदान किया गया। इस दैनिक पंचांग का संपादन व प्रकाशन मातृभूमि सेवा संस्था द्वारा किया गया है। जो पिछले कई वर्ष से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान और उनके त्याग को जन-जन तक पहुंचाने का पुनीत कार्य कर रही है। साथ ही ये संस्था समाजसेवा भी करती आ रही है।

संस्था के अध्यक्ष राकेश कुमार पिछले आठ वर्षों से जनसेवा कार्य करते चले आ रहे है। इसके साथ ही उन्होंने भारत के वीर बलिदानियों को समर्पित एक कैलेंडर का प्रकाशन शुरु किया जिसमें उन व्यक्तित्व के विषय में बताया गया है जिनके त्याग और राष्ट्र समर्पण से हम अनभिज्ञ है।

इस कैलेंडर में एक ऐसे व्यक्तित्व के विषय में प्रमुखता से स्थान दिया गया है जिन्होंने प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 से पूर्व वर्ष 1799 में ही अपने प्राणों की आहूति राष्ट्र को समर्पित कर दी। उनका नाम है बाबू जगत सिंह, एक लंबे शोध के बाद उनके इस बलिदान को विस्मृत हुए ऐतिहासिक दस्तावेजों से संकलित किया गया और सरकारी दस्तावेज में संपादित कराया गया। इस ऐतिहासिक शोध के लिए निर्मित समिति के सदस्य डॉ. अरविंद कुमार सिंह जो कि एक्सपोज टाइम्स के राजनीतिक संपादक भी है। उन्होंने ये कैलेंडर एक्सपोज टाइम्स के संपादक मोनेश श्रीवास्तव को प्रदान किया।

बाबू जगत सिंह का इतिहास

मातृभूमि सेवा संस्था के इस कैलेंडर के प्रथम माह जनवरी के पृष्ठ पर रेखांकित किया गया है कि सन् 1787-88 से बाबू जगत सिंह सारनाथ के खंडहरों के संरक्षणकर्ता रहे। अंग्रेजों के विरोध में किए गए विद्रोह के कारण बाबू जगत सिंह जी को 18 मार्च 1799 को उनके निवास स्थान जगतगंज कोठी से गिरफ्तार कर चुनार किले में कैद किया गया। 17 जून से 22 जुलाई 1799 तक बनारस की विशेष अदालत में उनपर मुकदमा चलाया गया। 10 अगस्त 1799 को चुनार किले से नदी परिवहन के द्वारा सशस्त्र सेना बल के साथ कोलकाता भेजा गया और 31 अगस्त को उन्हें फोर्ट विलियम (कलकत्ता) में कैद किया गया। 18 अक्टूबर 1799 को उन्हें सेंट हेलेना (साउथ अफ्रीका) जहां बाद में सन् 1815 में नेपोलियन बोनापार्ट को कैद में रखा गया, निर्वासित करने का निर्णय लिया गया। उन्हें यह सजा 19 अक्तूबर 1799 को सुनाई गई। जब उन्हें ऑस्टरली-111 जहाज पर चढ़ाने के लिए नाव से ले जाया जा रहा था तो अपने ही देश की मिट्टी से प्रेम के कारण 20 अक्तूबर 1799 को गंगासागर पहुंचकर उन्होंने सागर समाधि ले ली।

क्या है मातृभूमि सेवा संस्था

लगभग आठ वर्ष पहले एक शिक्षक राकेश कुमार अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक ऐसी पहल की जो ऐतिहासिक कदम बनकर उभरा है। उन्होंने पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट मातृभूमि सेवा संस्था की नीव रखी और भारतीय आदर्श, त्याग एवं बलिदान को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य आरंभ किया। 13 जुलाई 2020 से ये संस्था औपचारिक रूप से कार्यरत है। ये संस्था बड़े पैमाने पर ज़रूरतमंद लोगों की भलाई के लिए अपनी चैरिटेबल सर्विस दे रहा है और ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा सीधे तौर पर या इनडायरेक्टली, केंद्र और राज्य सरकारों की अलग-अलग ग्रांट-इन-एड स्कीम और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के लिए इनकम जेनरेशन प्रोग्राम के तहत जागरूकता, ट्रेनिंग, मोटिवेशन, रिसर्च, एक्शन और इम्प्लीमेंटेशन के ज़रिए अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग वेलफेयर एक्टिविटीज़ करके उनका उत्थान कर रहा है।संस्था द्वारा अच्छी सेहत, अच्छी शिक्षा, अच्छा माहौल, हमारे पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना का विकास और राष्ट्र को सबसे पहले रखने की भावना का प्रसार करता है। 

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