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बच्चों में भारतीय संस्कृति और ज्ञान का प्रस्फुटन ‘ऋषिव’ की अद्भुत पहल

 

XposeTimesNews. देश के नौनिहालों को भारतीय संस्कृति से अवगत कराने, उसे आत्मसात करने के लिए एक उत्कृष्ट पहल काशी से हुई है। इस पहल का नाम है काशी कुमारोत्सव लिटिल लीजेंड्स लिट-आर्ट फेस्टिवल 2025, इसका आयोजन किया है वाराणसी के दी ऋषिव लाइफ स्लून ने। इस कार्यक्रम बच्चों द्वारा भारतीय संस्कृति से परिपूर्ण प्रस्तुतिया दी गयी है।

रविवार को आयोजित यह समापन दिवस अनेक आकर्षक कार्यक्रमों से परिपूर्ण रहेगा, जिनमें संध्या का विशेष आकर्षण ‘बाल–युवा कवि सम्मेलन’ होगा। ऋषिव – वैदिक अनुसंधान, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के प्रांगण में अत्यन्त गरिमामय, रचनात्मक और उत्साहपूर्ण वातावरण में यह बाल–महोत्सव सम्पन्न हो रहा है। यह तीन दिवसीय उत्सव 14, 15 और 16 नवम्बर 2025 को प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक आयोजित किया जा रहा है और उत्सव में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है।

 

इक कार्यक्रम में संध्या–विमर्श में ‘संस्कार, शिक्षा, सृजन, संस्कृति और संरक्षण’ विषय पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने बच्चों, उनके शिक्षकगण एवं अभिभावकों को प्रेरक उद्बोधन प्रदान किया। मुख्य अतिथि श्री एन. पी. सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष, भारतीय शिक्षा बोर्ड ने अपनी उद्घाटन–व्याख्यान में कहा कि बच्चों को अपनी सनातनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराना और वैदिक तथा नैतिक मूल्यों से जोड़ना अत्यन्त आवश्यक है। जो भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित आधुनिक शिक्षा की नवीन पद्धति से ही संभव है। विशिष्ट अतिथि, राष्ट्रपति सम्मान–प्राप्त हिन्दी साहित्यकार, डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि माता–पिता का आचरण और घर–परिवार का वातावरण ही बच्चों में संस्कारों के बीज रोपित करता है। विशिष्ट अतिथि श्री विपिन कुमार राय, पुलिस उपाधीक्षक (डी.एस.पी.), एण्टी टेरर स्क्वाड, वाराणसी ज़ोन ने बाल–सुरक्षा के दृष्टिकोण से अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन एवं ऑफलाइन गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने की आवश्यकता समझाई, ताकि बच्चों और किशोरों को अपराध की प्रवृत्तियों से दूर रखा जा सके।

इस आयोजन में पद्मिनी मेहता द्वारा संचालित आर्ट–वर्कशॉप, ऋषिव का कलात्मक योगासन प्रदर्शन, इंटरएक्टिव गेम्स ज़ोन, मिथिलेश दुबे का कठपुतली–संसार, श्रेयसी मिश्रा का कथक नृत्य और विदुषी वर्मा का उपशास्त्रीय गायन विशेष आकर्षण के केंद्र बने। बच्चों ने जॉय–राइड्स, बाउंसी और ट्रैम्पोलिन का भरपूर आनंद लिया, जबकि बड़ों ने जेंगा, व्हील ऑफ़ फ़ॉर्च्यून और शूटिंग–गेम जैसे मनोरंजक खेलों में सक्रिय सहभागिता की।

पाँच वर्षीय युवान सिंह रघुवंशी का समरसॉल्ट एवं कार्ट–व्हील प्रदर्शन, धान्या सिंह और सांभवी मिश्रा का बाल–नृत्य, तथा दिव्यांशु का मूक–अभिनय दर्शकों को अत्यन्त प्रभावित कर गया। इसी क्रम में जौनपुर एवं वाराणसी के बाल–रंगकर्मियों द्वारा भारतीय इतिहास के प्रेरक प्रसंगों—मगध में चाणक्य–नीति, पन्ना धाय का बलिदान तथा अष्टावक्र की कथा आदि, का सशक्त मंचन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर बच्चों और किशोरों के कैरियर–निर्माण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के योगदान विषय पर डॉ. अपर्णा सिंह की अध्यक्षता में एक समसामयिक विमर्श भी आयोजित हुआ।

संयुक्त मजिस्ट्रेट बेंच, वाराणसी की बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सुश्री स्नेहा उपाध्याय ने कहा कि बच्चों को सही और गलत का स्पष्ट बोध कराना तथा कानूनी अधिकारों की जानकारी देना अत्यन्त अनिवार्य है, जिससे वे किसी भी दबाव या घबराहट में गलत निर्णय न लें और सुरक्षित रहें।

दूसरे दिन का आकर्षण थर्ड–आई (मिड–ब्रेन एक्टिवेशन) साइंस शो, तार्किक ‘मैजिक शो’, ‘हमारी धरोहर’ विषयक बाल–नाट्य प्रस्तुतियाँ हुई। बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, रचनात्मक कल्पनाशक्ति, मंचीय आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति–कौशल को अत्यधिक प्रेरित किया।

इस मंच के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास की ओर प्रेरित किया जा रहा है। जहाँ वे गायन, वादन, कविता, कहानी, अभिनय, नृत्य, चित्रकला और विविध कला–अभिव्यक्तियों के माध्यम से अपनी जन्मजात प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे। साथ ही बाल–युवा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है, जो विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

इस महोत्सव का मूल उद्देश्य नन्हें–बाल–मस्तिष्कों तथा उभरती बाल–प्रतिभाओं में ज्ञान, मूल्य एवं संस्कार, भारतीय संस्कृति का बोध और सृजनशीलता, कला एवं अभिव्यक्ति का संतुलित एवं सार्थक विकास करना है। यह उत्सव बाल–चेतना, संवेदना, जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और नवोन्मेष की लौ प्रज्वलित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल सिद्ध हो रहा है।

 

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