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बिहार विधानसभा में 2020 में क्या था चुनाव परिणाम

-                                  पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले थे 125 सीट वहीं महागठबंधन ने हासिल की थी 110 सीटें

बिहार विधानसभा चुनाव पूरे भारत के लिए किसी कौतुहल से कम नहीं है, इस चुनाव में कौन बाजी मारेगा और कौन पटखनी खाएगा इससे सभी दो चार होना चाहते हैं। 18वीं बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम में एनडीए पूर्ण बहुमत पा रही है। लेकिन ये भी जानना जरूरी है कि पिछले यानी सत्रहवी विधानसभा में चुनाव परिणाम क्या थे। और बिहार विधानसभा का इतिहास क्या है आइये जानते हैं।

बिहार विधानसभा में कुल 243 विधान सभा सीट है जिसमें बहुमत का आंकड़ा 122 का है। 2020 में विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 125 सीट हासिल की थी और सरकार बनायी थी जिसमें मुख्यमंत्री थे नीतीश कुमार। वहीं महागठबंधन को 110 सीटे मिली थी और अन्य दलों ने सात सीटें जीती थी। एक निर्वाचिक विधायक निर्दलीय था।  

इस विधानसभा में दो नए उपमुख्यमंत्री बनाये गये जिसमें तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को नए मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। वहीं दूसरी ओर तेजस्वी यादव विपक्ष के नेता और महागठबंधन के नेता चुने गये। और विजय कुमार सिन्हा बिहार विधानसभा के नए अध्यक्ष चुने गये।

बिहार विधानसभा का इतिहास

बिहार विधानसभा का पहला चुनाव 1952 में हुआ था। बिहार विभाजन से पहले इस राज्य में विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या 331 थी जिसमें एक मनोनीत सदस्य भी शामिल था। बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद विधानसभा की कुल सीट 243 रह गयी थी। बिहार के पहले मुख्यमंत्री के रूप में कृष्ण सिंह ने पद संभाला था। वहीं अनुग्रह नारायण सिंह सदन के पहले उपनेता और पहले उपमुख्यमंत्री बने थे।

भारत सरकार अधिनियम 1935 के पारित होने के बाद बिहार और उड़ीसा दो अलग राज्य बने। और द्विसदनीय विधानमंडल प्रणाली लागू की गई। 22 जुलाई 1936 को पहली विधान परिषद की स्थापना हुई। इसमें कुल 30 सदस्य थे और राजीव रंजन प्रसाद इसके अध्यक्ष चुने गये। 22 जुलाई 1937 को बिहार विधानसभा के दोनों सदन का पहला संयुक्त अधिवेशन हुआ था। तब राम दयालु सिंह बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गये।


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