बिहार विधान सभा चुनाव
का परिणाम बस कुछ समय में हमारे सामने होगा, फिलहाल एनडीए वोटों की गिनती में बढ़त
बनाये हुए है और जीत की ओर बढ़ती दिखायी दे रही है। वहीं महागठबंधन भी कड़ी टक्कर
दे रही है। वर्तमान रूझान के आधार पर कहां जा सकता है कि बिहार में प्रो इनकंबेंसी
की बयार है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब दिख रहे है, यदि
मुख्यमंत्री के व्यक्ति के तौर पर फेर बदल नहीं होता है तो नीतीश दसवी बार मुख्यमंत्री
बनने वाले हैं।
वोटों की गिनती के
आंकड़े सुबह दस बजे तक एनडीए 160 से आगे है और जेडीयू 75 प्लेस सीट पर आगे चलते
हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी। वहीं बीजेपी करीब 70 सीटों पर बढ़त बनाते
हुए दूसरी सबसे ज्यादा सीट जीतने वाली पार्टी बन रही है। जबकि आरजीडी तीसरे नंबर
पर पहुंच चुकी है।
बिहार में विधानसभा
चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 122 सीटों का है और एनडीए 160 प्लस सीट पर आगे है इससे
साफ हो जाता है कि बिहार एक बार फिर से एनडीए को चुन रहा है। यदि इस आंकड़े के
कारणों की बात की जाए तो, इसमें सबसे बड़ा काम किया है जनता को बिहार के जंगल राज
की याद दिलाकर। जनता के बीच जंगल राज का जो भय था यह उसका ही परिणाम है कि जंगल
राज की पार्टी आरजेडी बहुमत के करीब नहीं पहुंच सकी है।
यदि चुनावी मैदान में
राजनीतिक चेहरों की बात की जाए तो इसके में कोई दो राय नहीं कि नरेंद्र मोदी का
नाम पहले नंबर पर न लिया जाए। बिहार की जनता में कई ऐसे लोग है जो शायद मोदी की
पार्टी का नाम न जानते हो लेकिन नरेंद्र मोदी को वो भूल नहीं सकते। वहीं यदि
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देखा जाए तो सुशासन बाबू ने अपनी बेदाग छवि से कमाल
करते दिख रहे है। शराब बंदी उनकी सबसे बड़ी नीतियों में शामिल है जिसका परिणाम
उन्हें बिहार की महिलाओं ने दिया है।
बिहार चुनाव में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे तेजस्वी यादव लड़ाई लड़ते दिख रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी की जंगल राज की छवि अच्छा खासा झटका दे गयी है। वहीं कांग्रेस पार्टी की बात की जाए तो वह पूरी तरह से बिहार में हाशिये पर चली गयी है।
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