बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री है
कर्पूरी ठाकुर, उन्हें मरणोपरांत दिया जाएगा भारत रत्न भारत सरकार का बड़ा ऐलान
XTMedia बिहार। बिहार के पूर्व मुक्यमंत्री
कर्परी ठाकुर को भारत सरकार ने भारत रत्न देने की घोषणा की है। बुधवार को उनकी
100वीं जयंती है जिसके पहले उन्हें भारत रत्न देकर सम्मानित करने का ऐलान हुआ है।
इन्हें भारत रत्न देने की मांग जनतादल यूनाइटेड(जेडीयू) की थी। इस संबंद में
राष्ट्रपति भवन की ओर से जानकारी दी गयी है।
राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान
में ये कहा गया है कि भारत सरकार को बताते हुए बहुत गर्व है कि देश का सर्वोच्च
नागरिक सम्मान स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर को दिया जा रहा है। वह भारतीय राजनीति में
सामाजिक न्याय के पुरोधा और एक प्रेरणादायक हस्ती थे। यह सम्मान उनके द्वारा वंचित
वर्ग के उत्थान में कर्पूरी ठाकुर के योगदान और सामाजिक न्याय के प्रति उनके अथक
प्रयासों को श्रद्धांजलि है।
कौन थे कर्पूरी
ठाकुर
कर्पूरी ठाकुर का जन्म समस्तीपुर
जिले के पितौझिया गांव में हुआ था। 1940 में पटना से मैट्रिक पास करने के बाद
स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। कर्पूरी ठाकुर ने आचार्य नरेंद्र देव के विचारों
को अपनाया और बाद में समाजवाद का मार्ग चुना। इसके बाद 1942 में गांधी के असहयोग
आंदोलन में हिस्सा लिया जिसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
बिहार में पहली
बार बनी गैर-कांग्रेसी सरकार
ताजपुर विधानसभा से सोसलिस्ट
पार्टी की उम्मीदवारी में पहली बार 1952 में विधायक बने। बिहार विधानसभा चुनाव में
कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में संयुक्त सोसलिस्ट पार्टी उभरी और इसका नतीजा ये रहा
कि बिहार में पहली बार गैर कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी। महामाया प्रसाद सिन्हा
मुख्यमंत्री बने तो कर्पूरी ठाकुर उप मुख्यमंत्री बनकर शिक्षा मंत्रालय का
कार्यभार संभाला। शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने अंग्रेजी की अनिवार्यता और
छात्रों की फीस खत्म कर दी थी। बिहार की राजनीति ने बदलाव हुआ और कर्पूरी ठाकुर
मुख्यमंत्री बन गये इसके बाद उन्होंने उन खेतों पर मालगुजारी खत्म कर दी जिससे
किसानों को कोई मुनाफा नहीं होता था। साथ ही पांच एकड़ से कम खेती पर मालगुजारी
खत्म कर दी और उर्दू को राज्य भाषा का दर्जा दिलाया। इन कार्यों के चलते वह बिहार
की सियासत में समाजवाद का चेहरा बने। लोकनायक जयप्रकारश नारायण और राम मनोहर
लोहिया को राजनीतिक गुरु मानने वाले कर्पूरी ठाकुर ने मंडल आंदोलन से भी पहले
मुख्यमंत्री रहते हुए पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण दिया था।