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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहां हिन्दू पक्ष द्वारा
दाखिल सभी मुकदमें सुने जाने योग्य
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हिन्दू पक्ष द्वारा दाखिल 18 मुकदमे उनकी मेरिट
के आधार पर सुना जाएगा
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हिन्दु पक्ष का दावा मुस्लिम पक्ष के पास 2.5
एकड़ भूमि के स्वामित्व का कोई रिकॉर्ड नहीं
मथुरा
स्थित शाही ईदगाह और कृष्ण जन्मूभि विवाद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से मुस्लिम
पक्ष को बड़ा झटका लगा है। हिन्दू पक्ष द्वारा दाखिल इस मुकदमे को मुस्लिम पक्ष
द्वारा दी गयी चुनौती को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि
हिन्दू पक्ष द्वारा दाखिल सभी मुकदमे सुने जाने योग्य है। एक अगस्त दिन गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया है।
जस्टिस मयंक कुमार जैन की बेंच ने कहा है कि हिन्दू पक्ष की तरफ से
दाखिल 18 मुकदमों को उनकी मेरिट के आधार पर सुना जाएगा और
यह सभी कोर्ट में सुने जाने योग्य है।
मुस्लिम पक्ष की चुनौती क्यों हुई खारिज
हाई कोर्ट ने शाही ईदगाह कमिटी की ओर से दाखिल चुनौती को खारिज
किया और कहां कि यह मुकदमे इसलिए नहीं सुने जा सकते क्योंकि यह पूजा स्थल अधिनियम
के विरुद्ध हैं। कोर्ट का कहना कि इस मामले में यह कानून लागू नहीं होता। कोर्ट ने
यह निर्णय 6 जून, 2024 को सुरक्षित रख
लिया था। इस फैसले से हिन्दू पक्ष को बल मिला है।
ऑप इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में यह भी
दावा किया था कि जो भी याचिकाएं कृष्णजन्मभूमि के लिए डाली गई हैं, वो इस मामले में सीधे तौर पर जुड़े हुए नहीं हैं... मुस्लिम पक्ष का यह भी
दावा था कि उसका और हिन्दू पक्ष का 1968 में समझौता हो चुका
है, ऐसे में अब इन याचिकाओं का कोई महत्व नहीं है। कोर्ट ने
मुस्लिम पक्ष की यह दलील भी नहीं मानी।
मुस्लिम पक्ष ने कहा कि यह मस्जिद वक्फ की सम्पत्ति है। इस पर
हिन्दू पक्ष ने इस बात के सबूत दिखाने को कहा है कि इसे वक्फ को किसने दान किया
था। हिन्दू पक्ष ने यह भी कहा कि वक्फ की यह आदत रही है कि वह जमीनों पर कब्जा करके उनके
उपयोग में बदलाव करती है।
हिन्दू पक्ष की जिन याचिकाओं को कोर्ट ने आज सुनने लायक माना है
उनमें कई तर्क दिए गए हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि
जिस 2.5 एकड़ के इलाके पर यह शाही ईदगाह बना हुआ है, वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि का हिस्सा है। इसी के साथ हिन्दू पक्ष ने यह भी
दावा किया है कि मुस्लिमों के पास इसका कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
हिन्दू पक्ष का कहना है कि इस जमीन का स्वामित्व कटरा केशव देव के
पास है और साथ ही यह संरक्षित स्मारक भी है ऐसे में इस पर पूजा स्थल अधिनियम लागू
नहीं होगा। हिन्दू पक्ष का आरोप है कि बिना प्रक्रिया के ही इस जमीन को वक्फ बोर्ड
ने हथिया लिया है। हिन्दू पक्ष यहाँ पूजा अर्चना की अनुमति भी चाहता है। वहीं
मुस्लिम पक्ष चाहता है कि इस जमीन को लकर सुनवाई वक्फ ट्रिब्यूनल में ही हो।
केशवदेव मंदिर ध्वस्त कर बनाया गया था शाही ईदगाह
गौरतलब है कि यह शाही ईदगाह वर्तमान में विवादित है और इसको लेकर न्यायालयों में कई याचिकाएँ पड़ी हुई
हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह
वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया, जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर
कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते
हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।
हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ
था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला किया था और केशवदेव मंदिर को
ध्वस्त करके उसपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया और इसे मस्जिद कहने लगे। 13.37
एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ
से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं।