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भोजशाला एक मंदिर है, कोई मजहबी स्थल नहीं, एएसआई रिपोर्ट में आया सामने

98 दिन चले सर्वे में दर्जनों मुर्तियां और उनके अवशेष मिले, 2000 पन्नों की है सर्वे रिपोर्ट

कभी हुआ करता था माता सरस्वति का मंदिर, अब मजहबी स्थल के रूप में होता है इस्तमाल

NewsDesk XposeTimes

    भारत में इस्लामिक आक्रांताओं द्वारा मंदिरों को तोड़कर मस्जिद में बदल देने का इतिहास सदियों पुराना है, और इसके लिए हिन्दुओं द्वारा जारी संघर्ष भी लंबे समय से चलता चला आ रहा है। जिस प्रकार अयोध्या श्रीराम मंदिर का विवाद हो, वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी विवाद हो या मथुरा में श्रीकृष्ण जन्म स्थान-शाही ईदगाह विवाद हो ये सभी न्यायालय में विचारा धीन है इसी प्रकार मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला का विवाद है। इस प्रकरण में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(ASI) ने अपनी सर्वे रिपोर्ट मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में जमा कर दी है। इस रिपोर्ट में सर्वे के दौरान मिली सभी संरचनाओं की जानकारी दी गई है। सर्वे में मिली मूर्तियों, सिक्कों और चिन्हों की जानकारी दर्ज है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्वे के दौरान चाँदी, तांबे, एल्युमिनियम और स्टील के 31 सिक्के मिले हैं। यह सिक्के अलग-अलग ऐतिहासिक काल के हैं। इसमें दिल्ली के सल्तनत काल, मुग़ल काल और अलग-अलग समय के हैं। सिक्कों के अलावा 94 वास्तुशिल्प मिले हैं। इनमें मूर्तियाँ, मूर्तियों के खंडित हिस्से और पत्थरों पर उकेरी प्रतिमाएँ शामिल हैं। इस सर्वे में यह भी पाया गया है कि यहाँ के स्तम्भों पर मूर्तियाँ उकेरी गई थी। इन पर बने हुए देवता सशस्त्र थे। बताया गया कि इन छवियों में ब्रम्हा, गणेश, नरसिंह और भैरव के साथ ही पशुओं की आकृतियाँ भी हैं। इनमें कुछ मानव आकृतियाँ भी हैं। इसके अलावा इस परिसर के एक हिस्से में भित्तिचित्रों में मानव और सिंह समेत कई पशुओं के मुख वाली आकृतियाँ भी हैं। एक हिस्से में यह विकृत की गई थीं जबकि कुछ जगह यह सुरक्षित थीं। यहाँ कई शिलालेख भी मिले हैं। इनमें कई रचनाएँ लिखी हुई हैं। इन रचनाओं से भोजशाला के रूप में जानकारी मिलती है।


दो हजार पेज की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सर्वे में मिले एक शिलालेख में यहाँ परमार वंश के राजा नरवर्मन का शासन था। इससे इंगित होता है कि यहाँ मुस्लिमों के शासन करने से पहले हिन्दू राजा राज कर रहे थे। रिपोर्ट में यहाँ से मिले अन्य कई शिलालेख और चिन्ह को रिपोर्ट में जगह दी गई है। इस मामले में हिन्दू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया, “हिन्दू पक्ष की याचिका पर हाई कोर्ट ने यहाँ सर्वे का आदेश ASI को दिया था। यहाँ 98 दिन तक सर्वे चला। इस सर्वे में 1700 से अधिक अवशेष मिले हैं। इनमें 39 से अधिक मूर्तियाँ और प्रतिमाएँ हैं। इनमें गदा, पद्म, कमल और स्तम्भ के टुकड़े हैं। अब इस विषय में 22 जुलाई, 2024 को कोर्ट में सुनवाई है। हम इस मामले में कोर्ट से रिपोर्ट सार्वजनिक करने की अपील करेंगे।

ज्ञापव्य हो इस संबंध में हिंदू पक्ष ने याचिका डाली हुई है कि भोजशाला माँ वाग्देवी का मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे अपना मजहबी स्थल बताकर सर्वे के खिलाफ बोल रहे हैं। इस मामले में 11 मार्च को इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सर्वे की अनमुति दी थी। 22 मार्च से सर्वे शुरू हुआ, 1 अप्रैल को मुस्लिम पक्ष इसे रोकने सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, 29 अप्रैल को एएसआई के आवेदन पर सर्वे की समयसीमा और बढ़ाई गई, अब इस मामले में ASI ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी है।