महंगाई और बेरोजगारी
दस वर्ष में सृजित हुई 12.5 करोड़ नौकरियां, महंगाई दर भी पांच फीसद के रही नजदीक
- भारतीय स्टेट बैंक के अध्ययन में सामने आया रोजगार
सृजन का आंकड़ा
एक्सपोज टाइम्स डेस्क
देश में बेरोजागारी को लेकर एक आंकड़ा सामने
आया है जिसमें ये दावा किया गया है कि बीते दस वर्षों (2014-23) के बीच करीब 12.5
करोड़ नौकरियों का सृजन हुआ है। भारतीय स्टेट बैंक के एक अध्ययन में ये आंकड़ा
सामने आया है इसमें बताया गया है कि वर्ष 2004 से लेकर 2014 के दौरान 2.9 करोड़
नौकरियों का सृजन हुआ था। इस आंकड़े की पुष्टी ईपीएफओ के डाटा से भी होती है।
भारत में आजादी के
बाद से बेरोजगारी और महंगाई एक चुनावी मुद्दा रहा है, एक ओर प्रतिपक्ष अपनी रोटी
सेंकता है तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष दावे पर दावे पेश करता रहा है, लेकिन इन सबके
बीच पिसती तो जनता है। लेकिन हाल में जारी हुए आंकड़ों की माने तो देश में
बेरोजगारी और महंगाई पर काफी हद तक लगाम लगी है। वैश्विक महामारी और युद्ध जैसे
हालात से गुजर रहे विश्व भर में इसका असर देखने को मिल रहा है, बहुत हद तक इससे
भारत भी प्रभावित है, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार इन दो मुद्दों पर नियंत्रण करने
में काफी हद तक सफल रही है।
भारतीय स्टेट बैंक द्वारा हुए एक अध्ययन में बताया गया है
कि बीते दस वर्षों में रोजगार सृजन वर्ष 2004-14 के मुकाबले चार गुना बढ़ा है। इस
आंकड़े के बाद भाजपा ने विपक्ष पर हमला बोला है, भाजपा के प्रवक्ता सैयद जफर
इस्लाम ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर लगातार झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए
मोदी सरकार द्वारा रोजगार सृजन और महंगाई दर के आंकड़े रखे।
राहुल गांधी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में स्नातकों
के कम वेतन मिलने की एक रिपोर्ट को लेकर बेरोजगारी के कारण युवाओं की परेशानी के
लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। इस बयान को लेकर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि
आरबीआई की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2023-24 के दौरान लगभग पांच करोड़ युवाओं को
रोजगार मिला है जो राहुल गांधी के झूठ को बेनाकाब करने के लिए काफी है। उन्होंने
कहा कि मोदी सरकार के दस वर्षों में 12.5 करोड़ युवाओं को रोजगार मिला है, जबकि
कांग्रेस अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दस साल में मात्र 2.9 करोड़
रोजगार के अवसर सृजित किये गये थे।
आरबीआई के आंकड़ों के आधार पर एसबीआइ के आर्थिक अनुसंधान
विभाग द्वारा तैयार की गयी रिपोर्ट के अनुसार यदि कृषि क्षेत्र को छोड़ दे तो
मैन्यूफैक्चरिंग और सेवाओं में सृजित नैकरियों की कुल संख्या 2014-23 में 8.9
करोड़ और 2004-14 के दौरान 6.6 करोड़ है, पीएलएफएस और आरबीआइ के केएलईएमएस डाटा के
अनुसार, भारत ने 2017-18 से 2021-22 तक आठ करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किये
हैं।
2004
से 2014 तक महंगाई का ग्राफ
2004 में जब अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद संभाला तब उपभोक्ता कीमतों के आधार पर महंगाई दर 3.767 फीसदी थी। लेकिन कांग्रेस पार्टी की मनमोहन सरकार के दस
वर्षों यानी 2013 तक महंगाई दर 11 फीसदी पर पहुंच गयी थी। मनमोहन सिंह के शासनकाल में 2005
में महंगाई दर 4.246, 2006 में 5.797,
2007 में 6.373, 2008 में 8.349,
2009 में 10.882, 2010 में 11.989,
2011 में 8.858, 2012 में 9.312,
2013 में 11.064 और 2014 में 6.65 फीसदी रही। इस तरह देखा जाए तो
मनमोहन सिंह के 10 साल के शासन में वाजपेयी के शासनकाल की
तुलना में महंगाई न सिर्फ बढ़ी बल्कि इसकी रफ्तार भी बहुत तेज रही।
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