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वाराणसी भी
नहीं है अछूता, आठ सौ से ज्यादा लोगों की होती है मौत
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लैंसेट की स्टडी
में आया सामने, दस शहरों पर हुआ 2008 से 2017 तक शोध
दिल्ली। वायू प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने लोगों
का जीवन कष्टप्रद बना रखा है, एक नये अध्ययन में पाया गया है कि देश की राजधानी
दिल्ली में वायू प्रदूषण के चलते सबसे खतरनाख बन चुकी है। वैसे तो प्रदूषण की मार
देश का हर बड़ा शहर झेल रहा है, जिसमें दिल्ली, मुंबई,
कोलकाता और चेन्नई समेत कई शहर प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन लैंसेट
की स्टडी में राजधानी दिल्ली का हाल सबसे बुरा है। वायु प्रदूषण से भारत में सबसे
ज्यादा मौतें दिल्ली में हो रही हैं। लैंसेट की नई स्टडी में एयर पॉल्यूशन से होने
वाली मौतों का आंकड़ा भयावह हो चला है। इस स्टडी में कई बड़ी बातें सामने आई हैं।
न्यूज 18 इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के
मुताबिक लैंसेट में प्रकाशित यह भारत में की गई अपनी तरह की पहली मल्टी-सिटी स्टडी
है। जिसमें जानकारी मिली है कि दिल्ली में हर साल होने वाली मौतों में से करीब 11.5
प्रतिशत मौतें एयर पॉल्यूशन की वजह से हो रही हैं। संख्या के धारा
पर समझा जाए तो राजधानी दिल्ली में प्रतिवर्ष लगभग 12,000 लोग
जहरीली हवा की वजह से अपने प्राण त्याग रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह स्टडी देश
के 10 बड़े शहरों में की गई थी। इसमें पता चला है कि
अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता,
मुंबई, पुणे, शिमला और
वाराणसी में हर साल औसतन 33,000 से ज्यादा मौतें वायु
प्रदूषण के कारण होती हैं।
वाराणसी में वायू प्रदूषण की भेट चढ़ रहे है लोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जिसे
देश की सांसकृतिक राजधानी भी कहा जाता है यह भी वायू प्रदूषण की मार से अछूता नहीं
है। लैंसेट की स्टडी के मुताबिक वाराणसी शहर में भी हर साल करीब आठ सौ लोगों की
मौत का कारण वायू प्रदूषण बन रहा है।
यहां देखें पॉल्यूशन से होने वाली मौतों के आंकड़े
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दिल्ली |
11964 |
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मुंबई |
5091 |
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कोलकाता |
4678 |
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चेन्नई |
2870 |
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अहमदाबाद |
2495 |
|
बेंगलुरु |
2102 |
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हैदराबाद |
1597 |
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पुणे |
1367 |
|
वाराणसी |
831 |
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शिमला |
59 |
दिल्ली में सबसे ज्यादा मौतें, शिमला में
कम
वायू
प्रदूषण के कारण दिल्ली सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं, तो वही
शिमला अभी भी वायू प्रदूषण के मामले में सबसे सुरक्षित शहर है, शिमला में मृत्यु
दर सबसे कम है। हिमाचल की राजधानी शिमला में वायु प्रदूषण से हर साल सिर्फ 59
मौतें होती हैं, जो कुल मौतों का लगभग 3.7
प्रतिशत है। अध्ययन बताया गया है कि इन 10 शहरों
में होने वाली कुल मौतों का लगभग 7.2 प्रतिशत मृत्यु यानी हर
साल लगभग 33,000 लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है।
अध्ययन में पाया गया कि भारत के इन 10 शहरों में PM
2.5 की कंसंट्रेशन डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा (15
माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) से बहुत अधिक है। इसका 99.8% दिनों में ऐसा ही हाल रहता है।
शोधकर्ताओं
ने इस स्टडी के लिए 2008
से 2019 के बीच इन 10 शहरों
में नागरिक रजिस्ट्रियों से डेली डेथ डाटा इकट्ठा किया। प्रत्येक शहर के लिए इस
अवधि के दौरान केवल 3 से 7 साल का डेली
डेथ डाटा उपलब्ध कराया गया था। इन शहरों में कुल मिलाकर 36 लाख
से अधिक मौतों की जांच की गई। कई शहरों में वायु प्रदूषण डाटा पर शोधकर्ताओं ने
पहले से विकसित मशीन-लर्निंग आधारित एक्सपोज़र मॉडल का इस्तेमाल किया।
पॉल्यूशन बढ़ने पर मौत का ज्यादा खतरा !
गौर
करने वाली बात यह है कि इस स्टडी में सभी 10 शहरों में PM 2.5 के लेवल में प्रत्येक 10 माइक्रोग्राम/घन मीटर की
वृद्धि पर मृत्यु दर में 1.42 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दिल्ली में मृत्यु दर में 0.31 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई
जबकि बेंगलुरु में 3.06 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे पता चला
कि कम प्रदूषित शहरों में रहने वाले लोगों में प्रदूषित शहरों में रहने वाले लोगों
की तुलना में पॉल्यूशन के कारण मौत का जोखिम अधिक है। रिसर्चर्स का कहना है कि इस
स्टडी से भारत में पॉल्यूशन और हेल्थ को लेकर कई चीजें समझने में मदद मिल सकती है।