नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के मामले
में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार को पुलिस ने
गिरफ्तार कर लिया है, इसके साथ ही बिभव कुमार की ओर से दायर
अग्रिम जमानत की याचिका को कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दिया। गिरफ्तारी से पहले
ही बिभव ने दिल्ली पुलिस के अधिकारी को कॉल करके और ईमेल करके जाँच में सहयोग करने
का वादा किया था।
दरअसल, स्वाति मालीवाल ने 13 मई को
आरोप लगाया था कि जब वह सीएम हाउस अरविंद केजरीवाल से मिलने के लिए गई थीं,
तब बिभव कुमार ने उनके साथ मारपीट की थी, इस घटना की पुष्टी आप
सांसद संजय सिंह ने की थी और कहा था कि आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालाँकि, 16 मई को लखनऊ में एक राजनैतिक कार्यक्रम के अरविंद
केजरीवाल के साथ बिभव कुमार भी साथ गए।
स्वाति मालीवाल ने बिभव कुमार के खिलाफ 17 मई को शिकायत दी। अपनी
शिकायत में उन्होंने कहा था कि बिभव कुमार ने उन्हें सात से आठ बार थप्पड़ मारे।
पेट में मारा, छाती पर मारा और कमर से नीचे के हिस्से पर लात से
मारा। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने IPC की धारा 308,
354B, 506 और 509 जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज
किया है।
एफआईआर में बिभव कुमार पर गैर इरादतन हत्या के प्रयास, महिलाओं पर
हमला, आपराधिक
धमकी और शील का अपमान करने से संबंधित भारतीय दंड
संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
वहीं, बिभव कुमार ने भी स्वाति मालीवाल के खिलाफ अनधिकृत
प्रवेश, मौखिक दुर्व्यवहार और धमकियाँ देने सहित कई आरोप
लगाते हुए क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई है।
आईपीसी की धारा 308 (गैर इरादतन हत्या) के
आरोपित को सात
साल की सजा या जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।
आईपीसी की धारा 354B शील भंग करने से संबंधित है। इसके दोषी
को तीन से लेकर सात साल तक की सजा का प्रावधान है। धारा 506 (धमकी) के दोषी को दो साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकती है। धारा
509 के तहत तीन साल की सजा का प्रावधान है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरोपी बिभव कुमार घटना के बाद से सीएम
आवास में ही रह रहा था। जमानत
के चक्कर में पुलिस अधिकारियों को कॉल करके बिभव ने
कहा था, “मैं जाँच में आपको पूरा सहयोग करने के लिए तैयार
हूँ। इसलिए मुझे गिरफ्तार ना किया जाए।” दरअसल, बिभव के खिलाफ मुकदमा में अधिकतम सात साल की सजा के प्रावधान है। ऐसे में
पुलिस अधिकारी पर यह निर्भर करता है कि आरोपित को गिरफ्तार किया जाए अथवा नहीं।
अपनी गिरफ्तारी से एक दिन पहले यानी शुक्रवार (17 मई 2024) को बिभव कुमार ने दिल्ली पुलिस को एक ईमेल
भेजा। इस ईमेल में कहा गया कि वह स्वाति मालीवाल पर हमले वाले मामले की जांच में
सहयोग करने को तैयार हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि
पुलिस को उनकी शिकायत का भी संज्ञान लेना चाहिए, जो उन्होंने
कल दायर की थी।
बिभव ने आगे लिखा, “मीडिया के माध्यम से
अधोहस्ताक्षरी को यह पता चला है कि थाना सिविल लाइन्स में एक मामला एफ.आई.आर.
संख्या 27/2024 दर्ज किया गया है, जिसमें
अधोहस्ताक्षरी को आरोपित के रूप में नामित किया गया है। हालाँकि, अब तक इस मामले में अधोहस्ताक्षरी को कोई नोटिस नहीं दिया गया है।
अधोहस्ताक्षरी का स्पष्ट कहना है कि जाँच अधिकारी द्वारा कहे जाने पर वह जाँच में
शामिल होने के लिए तैयार है।”
अपनी शिकायत का जिक्र करते हुए विभव ने कहा, “यहाँ इस बात पर जोर दिया जा सकता है कि अधोहस्ताक्षरी ने 13 मई 2024 को हुई कथित घटना के सही तथ्यों को प्रकाश
में लाने के लिए 17 मई 2024 को अपराह्न
3:34 बजे ई-मेल के माध्यम से आईडी: sho-civilline-dl@nic.in और dep.north@delhipolice.gov.in पर एक
शिकायत भी की है। अनुरोध है कि इसे रिकॉर्ड में लाया जाए और कानून के अनुसार जाँच
की जाए।”
पुलिस के मुताबिक, आज सुबह भी बिभव से पुलिस
अधिकारियों की बातचीत हुई थी। पुलिस ने बातचीत करने के बहाने उन्हें मिलने के लिए
बुलाया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बता दें कि पुलिस पहले बिभव से पूछताछ
करेगी। फिर शाम तक तीस हजारी कोर्ट में पेश कर कस्टडी रिमांड लेगी। वहीं, तीस हजारी कोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर
दिया है।
बिभव कुमार बिहार के सासाराम के रहने वाले हैं। उन्होंने
पत्रकारिता का कोर्स किया है, लेकिन पत्रकार बनने के बजाय
वे एक्टिविस्ट बने। बिभव कुमार साल 2000 में पूर्व उप
मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के एक एनजीओ में काम करते थे। जब मनीष सिसोदिया और
अरविंद केजरीवाल मिलकर काम करने लगे तो बिभव अरविंद केजरीवाल से परिचित हुए।
बिभव ने आगे चलकर ‘इंडिया अगेंस्ट
करप्शन’ मुहिम के लोगों के साथ मैगजीन के लिए वीडियो
जर्नलिस्ट के तौर पर भी काम किया। इसके बाद बिभव अरविंद केजरीवाल के करीब आते चले
गए। वे उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों तरह से करीबी सहयोगी और प्रबंधक बन गए
हैं। इसके बाद आगे चलकर इसी दल आम आदमी पार्टी बनाई।
साल 2015 में बिभव कुमार को सह-टर्मिनस आधार पर अरविंद
केजरीवाल के निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। साल 2020 में जब AAP ने दूसरी बार दिल्ली में सरकार बनाई तो
उन्हें फिर से नियुक्त किया गया। इस साल अप्रैल में सतर्कता निदेशालय ने उत्पाद
शुल्क नीति मामले की जाँच के बाद केजरीवाल के पीए के रूप में बिभव कुमार की सेवाएँ
समाप्त कर दीं। इसके बावजूद वे केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद व्यक्ति हैं।